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bhagavat 3.13.2: विदुर ने कहा: हे ऋषिवर, स्वायम्भुव ने अपनी अति प्रिय पत्नी को पाने के बाद क्या किया, वे ब्रह्मा जी के परम प्रिय पुत्र हैं।   |   bhagavat अध्याय 3.13: वराह भगवान् का प्राकट्य   ।   bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 13: वराह भगवान् का प्राकट्य  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.13.2 
विदुर उवाच
स वै स्वायम्भुव: सम्राट् प्रिय: पुत्र: स्वयम्भुव: ।
प्रतिलभ्य प्रियां पत्नीं किं चकार ततो मुने ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
विदुर ने कहा: हे ऋषिवर, स्वायम्भुव ने अपनी अति प्रिय पत्नी को पाने के बाद क्या किया, वे ब्रह्मा जी के परम प्रिय पुत्र हैं।
 
Vidura said: O sage, what did Svayambhuva, the beloved son of Brahma, do after getting his most beloved wife?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)