सृजतो मे क्षितिर्वार्भि:प्लाव्यमाना रसां गता ।
अथात्र किमनुष्ठेयमस्माभि: सर्गयोजितै: ।
यस्याहं हृदयादासं स ईशो विदधातु मे ॥ १७ ॥
अनुवाद
ब्रह्मा ने विचार किया: जब मैं सृजन के कार्य में व्यस्त था तभी पृथ्वी जलमग्न हो गई और सागर की गहराई में चली गई। हम जो सृजन के इस कार्य में लगे हैं, अब क्या कर सकते हैं? सबसे अच्छा यही होगा कि सर्वशक्तिमान प्रभु हमारा मार्गदर्शन करें।
Brahma thought: While I was engaged in the work of creation, the earth was flooded and sunk into the depths of the ocean. What good can we who are engaged in this work of creation do? It would be best if the Almighty guides us.
तात्पर्य
प्रभु के भक्त, जो सभी गोपनीय सेवक हैं, कभी-कभी अपने संबंधित कर्तव्यों के निर्वहन में चकित हो जाते हैं, लेकिन वे कभी भी हतोत्साहित नहीं होते हैं। उन्हें प्रभु पर पूर्ण विश्वास है, और वह भक्त के कर्तव्य की सुचारू प्रगति के लिए मार्ग प्रशस्त करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥