मैत्रेय उवाच
परमेष्ठी त्वपां मध्ये तथा सन्नामवेक्ष्य गाम् ।
कथमेनां समुन्नेष्य इति दध्यौ धिया चिरम् ॥ १६ ॥
अनुवाद
श्री मैत्रेय ने कहा : इस प्रकार पृथ्वी जल में डूब चुकी थी, ब्रह्मा ने काफी देर तक सोचा कि कैसे पृथ्वी को ऊपर उठाया जाए।
Sri Maitreya said: Seeing the earth thus submerged in water, Brahma pondered for a long time as to how it could be lifted.
तात्पर्य
जीवा गोस्वामी के अनुसार, यहाँ जो विषय वर्णन किए गए हैं वे अलग-अलग सहस्राब्दियों के हैं। वर्तमान विषय श्वेत-वराह सहस्राब्दी के हैं, और चाक्षुष सहस्राब्दी से संबंधित विषयों पर भी इस अध्याय में चर्चा की जाएगी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥