varṇāśramācāravatā
puruṣeṇa paraḥ pumān
viṣṇur ārādhyate panthā
nānyat tat-toṣa-kāraṇam
"व्यक्ति वर्ण और आश्रम के नियमों का पालन करके भगवान विष्णु की पूजा कर सकता है। वर्णाश्रम प्रणाली के नियमों का पालन करने के अलावा भगवान को प्रसन्न करने का कोई और तरीका नहीं है।"
विष्णु की पूजा मानव जीवन का परम लक्ष्य है। जो लोग कामुकता की लालसा के लिए विवाहित जीवन की आज्ञा लेते हैं, उन्हें भगवान विष्णु को संतुष्ट करने की जिम्मेदारी भी लेनी होगी, और पहला कदम वर्णाश्रम-धर्म प्रणाली है। वर्णाश्रम-धर्म विष्णु की पूजा में उन्नति करने के लिए एक व्यवस्थित संस्था है। हालाँकि, यदि कोई सीधे भगवान की भक्ति में संलग्न हो जाता है, तो वर्णाश्रम-धर्म की अनुशासनात्मक प्रणाली से गुजरना आवश्यक नहीं हो सकता है। ब्रह्मा के अन्य पुत्र, कुमार, सीधे भक्ति में लगे हुए थे, और इस प्रकार उन्हें वर्णाश्रम-धर्म के सिद्धांतों का पालन करने की आवश्यकता नहीं थी।
