श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.12.7 
धिया निगृह्यमाणोऽपि भ्रुवोर्मध्यात्प्रजापते: ।
सद्योऽजायत तन्मन्यु: कुमारो नीललोहित: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि उसने अपने क्रोध को दबाने का पूरा प्रयास किया, किन्तु वह उसकी भौहों के बीच में से बाहर आ ही गया और तुरन्त नीललोहित रंग का एक बालक प्रकट हो गया।
 
यद्यपि उसने अपने क्रोध को दबाने का पूरा प्रयास किया, किन्तु वह उसकी भौहों के बीच में से बाहर आ ही गया और तुरन्त नीललोहित रंग का एक बालक प्रकट हो गया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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