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श्लोक 3.12.7  |
धिया निगृह्यमाणोऽपि भ्रुवोर्मध्यात्प्रजापते: ।
सद्योऽजायत तन्मन्यु: कुमारो नीललोहित: ॥ ७ ॥ |
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| अनुवाद |
| यद्यपि उसने अपने क्रोध को दबाने का पूरा प्रयास किया, किन्तु वह उसकी भौहों के बीच में से बाहर आ ही गया और तुरन्त नीललोहित रंग का एक बालक प्रकट हो गया। |
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| यद्यपि उसने अपने क्रोध को दबाने का पूरा प्रयास किया, किन्तु वह उसकी भौहों के बीच में से बाहर आ ही गया और तुरन्त नीललोहित रंग का एक बालक प्रकट हो गया। |
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