श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  3.12.57 
आकूतिं रुचये प्रादात्कर्दमाय तु मध्यमाम् ।
दक्षायादात्प्रसूतिं च यत आपूरितं जगत् ॥ ५७ ॥
 
 
अनुवाद
पिता मनु ने अपनी सबसे बड़ी पुत्री आकूति का विवाह ऋषि रुचि से करवाया, मझली पुत्री देवहूति का विवाह ऋषि कर्दम से और सबसे छोटी पुत्री प्रसूति का विवाह दक्ष से। इनके माध्यम से समस्त विश्व जनसंख्या से भर गया।
 
Father Manu gave his first daughter Akuti to Ruchi Muni, middle daughter Devahuti to Kardam Muni and the youngest daughter Prasuti to Daksha. Through them the whole world became populated.
तात्पर्य
ब्रह्मांड की आबादी के निर्माण का इतिहास इसके साथ दिया गया है। ब्रह्मा ब्रह्मांड में सबसे पहले जीवित प्राणी माने जाते हैं, जिनसे मनु स्वायंभुव और उनकी पत्नी शतरूपा को पैदा किया गया। मनु से दो पुत्र और तीन पुत्रियों का जन्म हुआ और उनसे ही विभिन्न ग्रहों की सभी आबादियाँ आज तक विकसित हुई हैं। इसलिये, ब्रह्मा को सभी के दादा के रूप में जाना जाता है और भगवान का व्यक्तित्व, ब्रह्मा के पिता होने के नाते, सभी जीवित प्राणियों के परदादा के रूप में जाने जाते हैं। इसकी पुष्टि भगवद-गीता (11.39) में निम्नलिखित रूप से की गई है:

वायुर यमो॒ग्निर वरुणः शशांकः

प्रजापतिर् त्वं प्रपितामहश्च

नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः

पुनश्च भूयो॒ॖपि नमो नमस्ते

"आप वायु के देवता हैं, सर्वोच्च न्यायकर्ता यम हैं, अग्नि हैं और वर्षा के देवता हैं। आप चन्द्रमा हैं और आप परदादा हैं। इसलिये मैं आपको बार-बार सादर नमन करता हूँ।"

 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध तीन के अंतर्गत बारहवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)