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श्लोक 3.12.57  |
आकूतिं रुचये प्रादात्कर्दमाय तु मध्यमाम् ।
दक्षायादात्प्रसूतिं च यत आपूरितं जगत् ॥ ५७ ॥ |
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| अनुवाद |
| पिता मनु ने अपनी सबसे बड़ी पुत्री आकूति का विवाह ऋषि रुचि से करवाया, मझली पुत्री देवहूति का विवाह ऋषि कर्दम से और सबसे छोटी पुत्री प्रसूति का विवाह दक्ष से। इनके माध्यम से समस्त विश्व जनसंख्या से भर गया। |
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| पिता मनु ने अपनी सबसे बड़ी पुत्री आकूति का विवाह ऋषि रुचि से करवाया, मझली पुत्री देवहूति का विवाह ऋषि कर्दम से और सबसे छोटी पुत्री प्रसूति का विवाह दक्ष से। इनके माध्यम से समस्त विश्व जनसंख्या से भर गया। |
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| इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध तीन के अंतर्गत बारहवाँ अध्याय समाप्त होता है । |
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