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श्रीमद् भागवतम
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स्कन्ध 3: यथास्थिति
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अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि
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श्लोक 53
श्लोक
3.12.53
ताभ्यां रूपविभागाभ्यां मिथुनं समपद्यत ॥ ५३ ॥
अनुवाद
ये दोनों पृथक शरीर कामुक संबंध में फिर से एक हो गए।
ये दोनों पृथक शरीर कामुक संबंध में फिर से एक हो गए।
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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