Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.12.51: ब्रह्मा जी ने अपने आप से कहा: अरे! यह एक विचित्र बात है कि मेरे सर्वत्र फैले हुए होने पर भी पूरे ब्रह्मांड में जनसंख्या अपर्याप्त है। इस दुर्भाग्य के पीछे भाग्य ही एकमात्र कारण है। | bhagavat अध्याय 3.12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मा जी ने अपने आप से कहा: अरे! यह एक विचित्र बात है कि मेरे सर्वत्र फैले हुए होने पर भी पूरे ब्रह्मांड में जनसंख्या अपर्याप्त है। इस दुर्भाग्य के पीछे भाग्य ही एकमात्र कारण है।
Brahma thought to himself: Alas! It is strange that despite my being spread everywhere, the population in the universe is still insufficient. The reason for this misfortune is nothing but fate alone.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥