श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.12.5 
तान् बभाषे स्वभू: पुत्रान् प्रजा: सृजत पुत्रका: ।
तन्नैच्छन्मोक्षधर्माणो वासुदेवपरायणा: ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
पुत्रों को उत्पन्न करने के बाद ब्रह्मा ने उनसे कहा, "बेटों, अब तुम लोग सन्तानें पैदा करो।" परन्तु सर्वश्रेष्ठ पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान वासुदेव के प्रति अभिमुख होने के कारण उन्होंने अपना लक्ष्य मोक्ष बना रखा था, इस कारण उन्होंने अपनी अनिच्छा प्रकट की।
 
पुत्रों को उत्पन्न करने के बाद ब्रह्मा ने उनसे कहा, "बेटों, अब तुम लोग सन्तानें पैदा करो।" परन्तु सर्वश्रेष्ठ पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान वासुदेव के प्रति अभिमुख होने के कारण उन्होंने अपना लक्ष्य मोक्ष बना रखा था, इस कारण उन्होंने अपनी अनिच्छा प्रकट की।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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