श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.12.41 
विद्या दानं तप: सत्यं धर्मस्येति पदानि च ।
आश्रमांश्च यथासंख्यमसृजत्सह वृत्तिभि: ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
शिक्षा, दान, तपस्या और सत्य को धर्म के चार स्तंभ कहा जाता है। इन्हें सीखने के लिए चार आश्रम हैं, जिनमें लोगों को उनके व्यवसाय के अनुसार अलग-अलग जातियाँ (वर्ण) दी गई हैं। ब्रह्मा ने इन सभी को एक व्यवस्थित क्रम में बनाया।
 
शिक्षा, दान, तपस्या और सत्य को धर्म के चार स्तंभ कहा जाता है। इन्हें सीखने के लिए चार आश्रम हैं, जिनमें लोगों को उनके व्यवसाय के अनुसार अलग-अलग जातियाँ (वर्ण) दी गई हैं। ब्रह्मा ने इन सभी को एक व्यवस्थित क्रम में बनाया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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