श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.12.4 
सनकं च सनन्दं च सनातनमथात्मभू: ।
सनत्कुमारं च मुनीन्निष्क्रियानूर्ध्वरेतस: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
प्रारंभ में, ब्रह्मा ने चार महान ऋषियों को जन्म दिया जिनके नाम सनक, सनंद, सनातन और सनत्कुमार हैं। वे सभी भौतिकवादी कार्यों को ग्रहण करने के इच्छुक नहीं थे, क्योंकि ऊर्ध्वरेता होने के कारण वे अत्यंत उच्च स्थान पर थे।
 
First of all, Brahma created four great sages named Sanaka, Sananda, Sanatana and Sanatkumara. They were all reluctant to take up materialistic activities because they were too exalted, being Urdhvareta.
तात्पर्य
यद्यपि ब्रह्मा ने अज्ञानता के सिद्धांतों को उन जीवों के लिए आवश्यकता के रूप में बनाया था जो प्रभु की इच्छा से अज्ञानता के लिए नियत थे, लेकिन वह इस तरह के कृतघ्न कार्य को करने से संतुष्ट नहीं थे। इसलिए उन्होंने ज्ञान के चार सिद्धांत बनाए: 1. सांख्य, भौतिक स्थितियों के विश्लेषणात्मक अध्ययन के लिए अनुभवजन्य दर्शन; 2. योग, भौतिक बंधन से शुद्ध आत्मा की मुक्ति के लिए रहस्यवाद; 3. वैराग्य, जीवन में भौतिक भोग से पूर्ण अलगाव की स्वीकृति, ताकि स्वयं को उच्चतम आध्यात्मिक समझ तक ऊपर उठाया जा सके; और 4. तप, आध्यात्मिक पूर्णता के लिए किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के स्वैच्छिक तप। ब्रह्मा ने चार महान ऋषियों सनक, सनंद, सनातन और सनत को बनाया ताकि उन्हें आध्यात्मिक उन्नति के इन चार सिद्धांतों को सौंप दिया जाए, और उन्होंने अपनी स्वयं की आध्यात्मिक पार्टी या संप्रदाय का उद्घाटन किया, जिसे कुमार संप्रदाय या बाद में निम्बार्क संप्रदाय के नाम से जाना जाता है, भक्ति की उन्नति के लिए। ये सभी महान ऋषि महान भक्त बन गए, क्योंकि भगवान के व्यक्तित्व के प्रति भक्ति सेवा के बिना कोई भी आध्यात्मिक मूल्य की किसी भी गतिविधि में सफलता प्राप्त नहीं कर सकता।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)