श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.12.33 
स इत्थं गृणत: पुत्रान् पुरो दृष्ट्वा प्रजापतीन् ।
प्रजापतिपतिस्तन्वं तत्याज व्रीडितस्तदा ।
तां दिशो जगृहुर्घोरां नीहारं यद्विदुस्तम: ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
समस्त प्रजापतियों के पिता ब्रह्मा ने अपने सारे प्रजापति पुत्रों को इस प्रकार बोलते देखा तो बहुत लज्जित हुए और तुरंत ही उन्होंने अपने शरीर को त्याग दिया। बाद में वही शरीर अंधेरे में एक भयावह कोहरे के रूप में हर जगह फैल गया।
 
समस्त प्रजापतियों के पिता ब्रह्मा ने अपने सारे प्रजापति पुत्रों को इस प्रकार बोलते देखा तो बहुत लज्जित हुए और तुरंत ही उन्होंने अपने शरीर को त्याग दिया। बाद में वही शरीर अंधेरे में एक भयावह कोहरे के रूप में हर जगह फैल गया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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