यह जीवों के लिए एक सबक है, जो दिखाता है कि असीमित यौन जीवन में लिप्त होना कितना पापमय कार्य है। घृणित यौन जीवन के बारे में सोचना भी पाप है, और ऐसे कृत्यों की भरपाई के लिए, व्यक्ति को अपना शरीर त्यागना पड़ता है। दूसरे शब्दों में, पापपूर्ण कार्यों से किसी के जीवन की अवधि, आशीर्वाद, वैभव आदि कम हो जाते हैं, और सबसे खतरनाक प्रकार का पापपूर्ण कार्य असीमित यौन संबंध है।
अज्ञानता पापपूर्ण जीवन का कारण है, या पापपूर्ण जीवन घोर अज्ञानता का कारण है। अज्ञानता की विशेषता अंधकार या कोहरा है। अंधेरा या कोहरा अभी भी पूरे ब्रह्मांड को ढके हुए है, और सूर्य एकमात्र प्रतिकूल सिद्धांत है। जो व्यक्ति भगवान, शाश्वत प्रकाश की शरण लेता है, उसे अंधेरे कोहरे या अज्ञान में नष्ट होने का कोई डर नहीं है।
