नैतत्पूर्वै: कृतं त्वद्ये न करिष्यन्ति चापरे ।
यस्त्वं दुहितरं गच्छेरनिगृह्याङ्गजं प्रभु: ॥ ३० ॥
अनुवाद
हे पिता, यह प्रदर्शन जिसमें आप स्वयं को उलझाने का प्रयास कर रहे हैं, वह न तो किसी अन्य ब्रह्मा द्वारा, न किसी अन्य व्यक्ति द्वारा, न पूर्व कल्पों में आपके द्वारा कभी किया गया, और न ही भविष्य में कोई इसकी हिम्मत करेगा। आप ब्रह्मांड के सर्वोच्च प्राणी हैं, तो आप अपनी बेटी के साथ संभोग क्यों करना चाहते हैं और अपनी इच्छा को वश में क्यों नहीं कर सकते?
O father, the act in which you are trying to engage yourself has never been attempted by any other Brahmā, nor by any other, nor by you in the past kalpas, nor will anyone ever dare to do it in the future. You are the supreme being of the universe, so why do you want to have intercourse with your daughter and why cannot you control your desire?
तात्पर्य
ब्रह्मा का पद ब्रह्मांड में सर्वोच्च पद है, और ऐसा प्रतीत होता है कि हमारे वर्तमान ब्रह्मांड के अलावा भी कई ब्रह्मा और कई ब्रह्मांड हैं। इस पद को भरने वाले को अपने व्यवहार में आदर्श होना चाहिए, क्योंकि ब्रह्मा सभी जीवों के लिए आदर्श स्थापित करता है। ब्रह्मा, वह जीव जो सबसे पवित्र और आध्यात्मिक रूप से उन्नत है, को भगवान के व्यक्तित्व के पद के बाद एक पद सौंपा गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥