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श्लोक 3.12.29  |
तमधर्मे कृतमतिं विलोक्य पितरं सुता: ।
मरीचिमुख्या मुनयो विश्रम्भात्प्रत्यबोधयन् ॥ २९ ॥ |
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| अनुवाद |
| मारिची आदि सभी ब्रह्मा के पुत्रों ने अपने पिता को अनैतिकता के कार्य में इस प्रकार मुग्ध पाकर बड़े आदरपूर्वक इस प्रकार कहा। |
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| मारिची आदि सभी ब्रह्मा के पुत्रों ने अपने पिता को अनैतिकता के कार्य में इस प्रकार मुग्ध पाकर बड़े आदरपूर्वक इस प्रकार कहा। |
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