श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.12.28 
वाचं दुहितरं तन्वीं स्वयम्भूर्हरतीं मन: ।
अकामां चकमे क्षत्त: सकाम इति न: श्रुतम् ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
हे विदुर, हमने सुना है कि ब्रह्मा जी की वाक् नाम की एक कन्या थी जो उनके शरीर से उत्पन्न हुई थी जिसने उनके मन को कामवासना की ओर आकर्षित किया यद्यपि वह उनके प्रति कामासक्त नहीं थी।
 
O Vidura, we have heard that Brahmā had a daughter named Vāc who was born from his body who attracted his mind towards sex though she was not sexually attracted towards him.
तात्पर्य
बली दृढ़ इंद्रिय-वर्ग बुद्धिमान व्यक्ति को भी खींच लेता है (भाग. 9.19.17)। कहा जाता है कि इंद्रियां इतनी पागल और प्रबल होती हैं कि सबसे समझदार और विद्वान व्यक्ति को भी भ्रम में डाल सकती हैं। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि व्यक्ति को अपनी माँ, बहन या बेटी के साथ भी अकेले रहकर जीवनयापन नहीं करना चाहिए। विद्वांसम अपि करषति का अर्थ है कि सबसे विद्वान भी कामुकता के आवेग के शिकार हो जाते हैं। मैत्रेय ने ब्रह्मा की इस विसंगति को बताने में हिचकिचाया, जो अपनी ही बेटी की ओर यौन आकर्षण रखते थे, लेकिन फिर भी उन्होंने इसका उल्लेख किया क्योंकि कभी-कभी ऐसा होता है, और ब्रह्मा स्वयं इसका जीवंत उदाहरण हैं, यद्यपि वे आदिम सजीव प्राणी हैं और पूरे ब्रह्मांड में सबसे अधिक विद्वान हैं। अगर ब्रह्मा कामुकता के आवेग के शिकार हो सकते हैं, तो दूसरों का क्या, जो इतनी सांसारिक कमजोरियों से ग्रस्त हैं? ब्रह्मा की ओर से इस असाधारण अनैतिकता के बारे में सुना गया था कि यह किसी विशेष कल्प में हुआ था, लेकिन उस कल्प में नहीं हुआ होगा जिसमें ब्रह्मा ने प्रभु से सीधे श्रीमद्-भागवतम के चार मूलभूत छंद सुने थे क्योंकि भगवान ने ब्रह्मा को भागवतम पर पाठ देने के बाद उन्हें आशीर्वाद दिया था कि वह कभी भी किसी भी कल्प में विचलित नहीं होंगे। यह इंगित करता है कि श्रीमद्-भागवतम को सुनने से पहले वह ऐसी कामुकता के शिकार हो सकते हैं, लेकिन भगवान से सीधे श्रीमद्-भागवतम को सुनने के बाद, ऐसी असफलताओं की कोई संभावना नहीं थी।

हालाँकि, इस घटना को गंभीरता से लेना चाहिए। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, और महिला के साथ उसका बिना किसी प्रतिबंध के मिलना-जुलना पतन की ओर ले जाता है। पुरुष और महिला की ऐसी सामाजिक स्वतंत्रता, विशेष रूप से युवा वर्ग में, निश्चित रूप से आध्यात्मिक प्रगति के मार्ग पर एक बड़ी बाधा है। भौतिक बंधन केवल कामुक बंधन के कारण होता है, और इसलिए पुरुष और महिला का अप्रतिबंधित संपर्क निश्चित रूप से एक बड़ी बाधा है। मैत्रेय ने यह उदाहरण ब्रह्मा की ओर से केवल हमारे सामने इस महान खतरे को लाने के लिए उद्धृत किया।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)