कामदेव और इच्छा ब्रह्मा के हृदय से प्रकट हुए, क्रोध उनकी भौंहों के बीच से, लोभ उनके होठों के बीच से, बोलने की शक्ति उनके मुँह से, सागर उनके लिंग से और नीच और निंदनीय क्रियाकलाप सभी पापों के स्रोत उनकी गुदा से प्रकट हुए।
Lust and desire appeared from Brahma's heart, anger from between his eyebrows, greed from between his lips, the power of speech from his mouth, the ocean from his penis and low and despicable activities, the source of all sins, appeared from his anus.
तात्पर्य
एक आचारविचारशील मनुष्य मानसिक विचारों के प्रभाव में होता है। नश्वर शिक्षा और अधिगम के अनुमान में वह चाहे जितना भी महान क्यों न हो, वह मानसिक गतिविधियों के प्रभाव से मुक्त नहीं हो सकता। इसलिए, जब तक कोई प्रभु की भक्ति सेवा में नहीं होता, तब तक वासना और निम्न कार्यकलापों के छोड़ देना बहुत कठिन है। जब कोई वासना और निम्न इच्छाओं से निराश होता है, तो मन से क्रोध उत्पन्न होता है और भृकुटियों के बीच से प्रकट होता है। इसलिए सामान्य पुरुषों को सलाह दी जाती है कि भृकुटियों के बीच वाले स्थान पर ध्यान केंद्रित करके मन को एकाग्र करें, जबकि प्रभु के भक्त पहले से ही अपने मन के आसन पर भगवान की सर्वोच्च विभूति को स्थापित करने के लिए प्रेरित होते हैं। इच्छाहीन बनने का सिद्धांत अस्थिर है क्योंकि मन को इच्छाहीन नहीं बनाया जा सकता है। जब यह अनुशंसा की जाती है कि किसी को इच्छाहीन होना चाहिए, तो यह समझा जाता है कि उसे ऐसी चीजों की इच्छा नहीं करनी चाहिए जो आध्यात्मिक मूल्यों के लिए विनाशकारी हैं। भगवान का भक्त अपने मन में हमेशा प्रभु को रखता है, और इस प्रकार उसे इच्छाहीन होने की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि उसकी सभी इच्छाएं प्रभु की सेवा के संबंध में हैं। बोलने की शक्ति को सरस्वती कहा जाता है, या विद्या की अधिष्ठात्री देवी, और विद्या की अधिष्ठात्री देवी का जन्मस्थान ब्रह्मा का मुख है। भले ही कोई पुरुष विद्या की अधिष्ठात्री देवी के अनुग्रह से संपन्न हो, तो भी संभव है कि उसका हृदय वासना और भौतिक इच्छा से भरा हो और उसकी भृकुटियाँ क्रोध के लक्षण प्रदर्शित करें। कोई नश्वर अनुमान में बहुत अधिक विद्वान हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह वासना और क्रोध की सभी निम्न गतिविधियों से मुक्त है। अच्छी योग्यताओं की अपेक्षा केवल एक शुद्ध भक्त से ही की जा सकती है, जो हमेशा प्रभु के विचार में लगा रहता है, या श्रद्धा के साथ समाधि में रहता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥