श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.12.20 
मैत्रेय उवाच
एवमात्मभुवादिष्ट: परिक्रम्य गिरां पतिम् ।
बाढमित्यमुमामन्‍त्र्य विवेश तपसे वनम् ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
श्री मैत्रेय जी कहते हैं: इस प्रकार ब्रह्मा जी के आदेश से रुद्र ने वेदों के स्वामी और अपने पिता की परिक्रमा की। उनसे हाँ शब्द बोलकर घोर तपस्या करने के लिए वन में चले गए।
 
श्री मैत्रेय जी कहते हैं: इस प्रकार ब्रह्मा जी के आदेश से रुद्र ने वेदों के स्वामी और अपने पिता की परिक्रमा की। उनसे हाँ शब्द बोलकर घोर तपस्या करने के लिए वन में चले गए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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