श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.12.2 
ससर्जाग्रेऽन्धतामिस्रमथ तामिस्रमादिकृत् ।
महामोहं च मोहं च तमश्चाज्ञानवृत्तय: ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा ने सबसे पहले अज्ञानतापूर्ण प्रवृत्तियों को बनाया, जैसे कि स्वयं को धोखा देना, मौत का डर, हताशा के बाद क्रोध, झूठी स्वामित्व की भावना और शरीर के प्रति मोह या अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाना।
 
ब्रह्मा ने सबसे पहले अज्ञानतापूर्ण प्रवृत्तियों को बनाया, जैसे कि स्वयं को धोखा देना, मौत का डर, हताशा के बाद क्रोध, झूठी स्वामित्व की भावना और शरीर के प्रति मोह या अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाना।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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