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श्लोक 3.12.19  |
तपसैव परं ज्योतिर्भगवन्तमधोक्षजम् ।
सर्वभूतगुहावासमञ्जसा विन्दते पुमान् ॥ १९ ॥ |
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| अनुवाद |
| केवल तपस्या के द्वारा ही उस भगवान् के व्यक्तित्व के पास पहुँचा जा सकता है, जो प्रत्येक जीव के हृदय के भीतर हैं और सभी इन्द्रियों की पहुँच से परे भी हैं। |
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| केवल तपस्या के द्वारा ही उस भगवान् के व्यक्तित्व के पास पहुँचा जा सकता है, जो प्रत्येक जीव के हृदय के भीतर हैं और सभी इन्द्रियों की पहुँच से परे भी हैं। |
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