श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.12.18 
तप आतिष्ठ भद्रं ते सर्वभूतसुखावहम् ।
तपसैव यथापूर्व स्रष्टा विश्वमिदं भवान् ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
हे मेरे प्यारे बेटे, तू तपस्या में लग जा जो सभी जीवों के लिए कल्याणकारी है और जो तुझे सभी वरदान प्रदान कर सकती है। तपस्या के द्वारा ही तू पूर्ववत ब्रह्मांड की रचना कर सकता है।
 
हे मेरे प्यारे बेटे, तू तपस्या में लग जा जो सभी जीवों के लिए कल्याणकारी है और जो तुझे सभी वरदान प्रदान कर सकती है। तपस्या के द्वारा ही तू पूर्ववत ब्रह्मांड की रचना कर सकता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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