श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 12: कुमारों तथा अन्यों की सृष्टि  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.12.16 
रुद्राणां रुद्रसृष्टानां समन्ताद् ग्रसतां जगत् ।
निशाम्यासंख्यशो यूथान् प्रजापतिरशङ्कत ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
रुद्र के पुत्र और पोते असंख्य थे और जब वे एकत्र हुए तो उन्होंने पूरे ब्रह्मांड को निगलने का प्रयास किया। जब जीवों के पिता ब्रह्मा ने यह देखा, तो वह स्थिति से डर गए।
 
The number of sons and grandsons produced by Rudra was infinite and when they gathered together they began to swallow the entire universe. When Brahma, the father of living beings, saw this, he became frightened of the situation.
तात्पर्य
क्रोध के अवतार रुद्र की परम्पराएँ सार्वभौमिक विषयों के संचालन के लिए इतनी ज़्यादा ख़तरनाक थीं कि जीवों के पिता ब्रह्मा भी उनसे भयभीत हो गये। रुद्र के तथाकथित भक्त या अनुयायी भी संकट हैं। कई बार वे रुद्र के लिए भी खतरनाक होते हैं। रुद्र के वंशज कई बार रुद्र की हत्या की योजना बनाते हैं- रुद्र की कृपा से। यह उनके भक्तों का स्वभाव है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)