Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.11.15: हे विदुर, सूर्य अपनी प्रचंड ऊष्मा और प्रकाश से सभी प्राणियों को जीवन प्रदान करता है। वह सभी प्राणियों की आयु को कम करता है ताकि उन्हें भौतिक आसक्ति के मोह से मुक्त किया जा सके। वह स्वर्गलोक तक जाने के मार्ग को विस्तृत और सुगम बनाता है। इस प्रकार वह आकाश में अत्यधिक वेग से गति करता है, इसलिए प्रत्येक पाँच वर्ष में सभी को पूजा की पूरी सामग्री के साथ उसका सम्मान करना चाहिए। | bhagavat अध्याय 3.11: परमाणु से काल की गणना । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे विदुर, सूर्य अपनी प्रचंड ऊष्मा और प्रकाश से सभी प्राणियों को जीवन प्रदान करता है। वह सभी प्राणियों की आयु को कम करता है ताकि उन्हें भौतिक आसक्ति के मोह से मुक्त किया जा सके। वह स्वर्गलोक तक जाने के मार्ग को विस्तृत और सुगम बनाता है। इस प्रकार वह आकाश में अत्यधिक वेग से गति करता है, इसलिए प्रत्येक पाँच वर्ष में सभी को पूजा की पूरी सामग्री के साथ उसका सम्मान करना चाहिए।
O Vidura, the Sun gives life to all beings by his infinite heat and light. He shortens the lifespan of all beings in order to free them from the temptations of material attachment. He lengthens the path up to the heavenly planets. Thus he moves with great speed in the sky, therefore one should offer obeisance to him with all the articles of worship once every five years.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥