परिपक्व दिव्य ज्ञान में भगवान की अहैतुकी भक्ति के कारण ब्रह्माजी ब्रह्माण्ड में सर्वोच्च पुरुष हैं। इसलिए उन्होंने विभिन्न जीवों के रहने के लिए चौदह लोकों का सृजन किया।
Due to his causeless devotion to the Lord in mature divine knowledge, Lord Brahma is the supreme being in the universe. That is why he created fourteen worlds for the residence of different types of living entities.
तात्पर्य
परमेश्वर जीवों के सभी गुणों के भंडार हैं। भौतिक दुनिया में स्थित आत्माएँ उन गुणों के केवल एक हिस्से को प्रतिबिंबित करती हैं, और इसलिए उन्हें कभी-कभी प्रतिबिंब कहकर बुलाया जाता है। ये प्रतिबिंब जीव, परमेश्वर के अंगों और भागों के रूप में, उनके मूल गुणों के अलग-अलग अनुपातों को विरासत में प्राप्त करते हैं, और इन गुणों की विरासत के संदर्भ में, वे जीवन की विभिन्न प्रजातियों के रूप में प्रकट होते हैं और ब्रह्मा की योजना के अनुसार विभिन्न ग्रहों में निवास करते हैं। ब्रह्मा तीनों लोकों के निर्माता हैं, जिन्हें पाताललोक नामक निचले लोक, भूलोक नामक मध्य के लोक और स्वर्गलोक नामक ऊपरी लोक कहा जाता है। माहरलोक, तपोलोक, सत्यलोक और ब्रह्मलोक जैसे अभी भी उच्च ग्रह विनाशकारी जल में नहीं घुलते हैं। इसका कारण इनके निवासियों द्वारा प्रभु को प्रदान की गई निस्वार्थ भक्ति सेवा है, जिसका अस्तित्व द्वि-पराद्र्ध समय के अंत तक जारी रहता है, जब वे आम तौर पर भौतिक दुनिया में जन्म और मृत्यु की श्रृंखला से मुक्त हो जाते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥