श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 10: सृष्टि के विभाग  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.10.5 
तद्विलोक्याब्जसम्भूतो वायुना यदधिष्ठित: ।
पद्ममम्भश्च तत्कालकृतवीर्येण कम्पितम् ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, ब्रह्मा ने देखिह कि वह कमल जिस पर वह स्थिर थे और वह जल जिसमें कमल खिल रखा है, वायु के वेग से कांप रहे हैं।
 
Thereafter, Brahma saw that the lotus on which he was sitting and the water in which the lotus had grown were shaking due to the strong winds.
तात्पर्य
भौतिक दुनिया को मायावी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह प्रभु की पारलौकिक सेवा को भूलने का स्थान है। इस प्रकार, भौतिक दुनिया में प्रभु की भक्ति सेवा में लगे व्यक्ति को कभी-कभी बहुत अजीब परिस्थितियों से परेशान होना पड़ सकता है। मायावी ऊर्जा और भक्त के बीच युद्ध की घोषणा होती है, और कभी-कभी कमजोर भक्त शक्तिशाली मायावी ऊर्जा के हमले का शिकार हो जाते हैं। हालाँकि, भगवान ब्रह्मा प्रभु की अकारण दया से पर्याप्त रूप से मजबूत थे, और उन्हें भौतिक ऊर्जा का शिकार नहीं बनाया जा सका, हालाँकि इसने उन्हें चिंता का कारण दिया जब यह उनके अस्तित्व को खतरे में डालने में कामयाब रही।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)