Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.10.20: सभी निश्चल पेड़-पौधे ऊपर की ओर बढ़ने का प्रयास करते हैं। वे लगभग बेहोश होते हैं परंतु उनके भीतर पीड़ा का अनुभव होता है। वे विभिन्न प्रकार से प्रकट होते हैं। | bhagavat अध्याय 3.10: सृष्टि के विभाग । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सभी निश्चल पेड़-पौधे ऊपर की ओर बढ़ने का प्रयास करते हैं। वे लगभग बेहोश होते हैं परंतु उनके भीतर पीड़ा का अनुभव होता है। वे विभिन्न प्रकार से प्रकट होते हैं।
All immobile plants grow upwards. They are unconscious, but deep inside they feel pain. They appear in various forms.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥