जब भगवान श्रीकृष्ण भौतिक रूप से श्यामसुंदर के अपने शाश्वत, आनंदपूर्ण रूप में सांसारिक दुनिया में मौजूद थे, तब जो प्रभु के निष्ठावान भक्त नहीं थे वोह उन्हें पहचान नहीं सके या उनकी महिमा नहीं जान सके। अवाजानन्ति माम मूढ़ा मानुशी तनूम आश्रितम् (भगवद् गीता 9.11): वह हमेशा अविश्वासियों को भ्रमित करते रहते है, परन्तु उन्हें हमेशा भक्त अपनी शुद्ध भक्ति सेवा के बल पर देख सकते है।
