श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 1: विदुर द्वारा पूछे गये प्रश्न  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.1.40 
अहो पृथापि ध्रियतेऽर्भकार्थे
राजर्षिवर्येण विनापि तेन ।
यस्त्वेकवीरोऽधिरथो विजिग्ये
धनुर्द्वितीय: ककुभश्चतस्र: ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
हे स्वामी, क्या पृथा अब भी जीवित हैं? वे अपने अनाथ बच्चों के लिए ही जीवित हैं। अन्यथा राजा पाण्डु के बिना उनके लिए जीवित रहना असंभव था, जो सबसे शक्तिशाली सेनापति थे और जिन्होंने केवल अपने दूसरे धनुष के बल पर ही चारों दिशाओं पर विजय प्राप्त कर ली थी।
 
O lord, is Pritha still alive? She survived only for the sake of her fatherless children; otherwise it would have been impossible for her to survive without King Pandu, who was the greatest general and who had single-handedly conquered the four directions with the power of his second bow.
तात्पर्य
एक निष्ठावान पत्नी अपने पति के बिना नहीं रह सकती हैं, इसलिए सभी विधवाएं स्वेच्छा से दाहक अग्नि को गले लगाती थीं, जो मृत पति को भस्म कर देती थी। यह प्रणाली भारत में बहुत आम थी क्योंकि सभी पत्नियां अपने पति के प्रति पवित्र और वफादार थीं। बाद में कली युग के आगमन के साथ, पत्नियाँ धीरे-धीरे अपने पतियों के प्रति कम निष्ठावान होने लगीं, और विधवाओं द्वारा स्वेच्छा से अग्नि को गले लगाने की प्रथा अतीत की बात हो गई। हाल ही में इस प्रणाली को समाप्त कर दिया गया, क्योंकि स्वैच्छिक प्रणाली एक जबरदस्त सामाजिक प्रथा बन गई थी।

जब महाराजा पाण्डु की मृत्यु हुई, तो उनकी दोनों पत्नियाँ, कुंती और माध्री, अग्नि को गले लगाने के लिए तैयार थीं, लेकिन माध्री ने कुंती से छोटे बच्चों, पाँच पाण्डवों के लिए जीने का अनुरोध किया। व्यासदेव के अनुरोध पर कुंती ने इस पर सहमति जताई। अपने महान शोक के बावजूद, कुंती ने जीने का फैसला किया, अपने पति की अनुपस्थिति में जीवन का आनंद लेने के लिए नहीं, बल्कि केवल बच्चों की सुरक्षा करने के लिए। विदुर द्वारा इस घटना का उल्लेख यहाँ इसलिए किया गया है क्योंकि वे अपनी भाभी कुंतीदेवी के बारे में सभी तथ्यों को जानते थे। यह समझा जाता है कि महाराजा पाण्डु एक महान योद्धा थे और वे अकेले, धनुष और बाण की मदद से दुनिया की चारों दिशाओं को जीत सकते थे। ऐसे पति की अनुपस्थिति में, कुंती का विधवा के रूप में भी जीवित रहना लगभग असंभव था, लेकिन उन्हें पाँच बच्चों की खातिर ऐसा करना पड़ा।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)