कच्चित्कुरूणां परम: सुहृन्नो
भाम: स आस्ते सुखमङ्ग शौरि: ।
यो वै स्वसृणां पितृवद्ददाति
वरान् वदान्यो वरतर्पणेन ॥ २७ ॥
अनुवाद
कुरुओं के सबसे अच्छे मित्र, हमारे बहनोई वसुदेव, क्या स्वस्थ हैं? वे अत्यंत दयालु हैं। वे अपनी बहनों के प्रति पिता तुल्य हैं और अपनी पत्नियों के प्रति सदैव हँसमुख रहते हैं।
[Please tell me] whether our brother-in-law Vasudeva, the best friend of the Kurus, is well? He is very kind. He is like a father to his sisters and is always cheerful towards his wives.
तात्पर्य
भगवान कृष्ण के पिता वसुदेव की सोलह पत्नियाँ थीं और उनमें से एक, पौरवी या रोहिणी, बलदेव की माँ, विदुर की बहन थीं। इसलिए, वसुदेव विदुर की बहन के पति थे, और इस प्रकार, वे साले-बहनोई थे। वसुदेव की बहन कुंती, विदुर के बड़े भाई पाण्डु की पत्नी थी, और उस संदर्भ में, वसुदेव भी विदुर के साले थे। कुंती वसुदेव से छोटी थीं और एक बड़े भाई का कर्तव्य होता है कि वह अपनी छोटी बहनों से एक बेटी की तरह व्यवहार करे। जब भी कुंती को किसी चीज की आवश्यकता होती, वसुदेव अपनी छोटी बहन के लिए अपने महान प्रेम के कारण उसे उदारतापूर्वक देते थे। वसुदेव ने कभी भी अपनी पत्नियों को असंतुष्ट नहीं किया, और साथ ही, वह अपनी बहन की इच्छित वस्तुओं की आपूर्ति करते थे। उनका कुंती के लिए विशेष ध्यान था क्योंकि वह कम उम्र में ही विधवा हो गई थी। वसुदेव के कल्याण के बारे में पूछताछ करते हुए, विदुर ने उनके बारे में और पारिवारिक संबंधों के बारे में सब कुछ याद किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥