श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 1: विदुर द्वारा पूछे गये प्रश्न  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.1.24 
ततस्त्वतिव्रज्य सुराष्ट्रमृद्धं
सौवीरमत्स्यान् कुरुजाङ्गलांश्च ।
कालेन तावद्यमुनामुपेत्य
तत्रोद्धवं भागवतं ददर्श ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद वह सूरत, सौवीर और मत्स्य जैसे अत्यंत धनाढ्य प्रांतों से होकर और कुरुजांगल नाम से प्रसिद्ध पश्चिमी भारत से होकर गुजरा। अंततः वह यमुना के तट पर पहुँच गया, जहाँ उसकी भेंट भगवान कृष्ण के महान भक्त उद्धव से हुई।
 
After that he passed through very wealthy provinces like Surat, Sauvir and Matsya and through western India known as Kurujangal. At last he reached the banks of Yamuna where he met Uddhava, a great devotee of Krishna.
तात्पर्य
आधुनिक दिल्ली से उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले तक की लगभग सौ वर्गमील तक फैली हुई भूमि, जिसमें पंजाब (पूर्वी भारत) के गुड़गाँव ज़िले का एक हिस्सा भी शामिल है, पूरे भारत में शीर्ष तीर्थस्थल माना जाता है। यह भूमि पवित्र है क्योंकि भगवान कृष्ण कई बार इसके माध्यम से यात्रा की थी। उनके प्रकट होने की शुरुआत से ही, वे मथुरा में अपने मामा कंस के घर थे, और उनका पालन-पोषण उनके पालक पिता महाराज नंद ने वृन्दावन में किया था। भगवान के अभी भी कई भक्त हैं जो कृष्ण और उनके बचपन के सहयोगियों, गोपियों की खोज में परमानंद में वहीं विराम ले रहे हैं। ऐसा नहीं है कि ऐसे भक्त उस भूमि में कृष्ण से आमने-सामने मिलते हैं, लेकिन एक भक्त का कृष्ण के लिए उत्सुकता से खोजना उनके उसे व्यक्तिगत रूप से देखने जितना ही अच्छा है। यह कैसे होता है इसे समझाया नहीं जा सकता, लेकिन इसे वास्तव में महसूस किया जाता है जो भगवान के शुद्ध भक्त होते हैं। दार्शनिक रूप से, कोई समझ सकता है कि भगवान कृष्ण और उनका स्मरण परम तल पर है और वृन्दावन में शुद्ध ईश्वर चेतना में उन्हें खोजने का विचार ही भक्त को उन्हें आमने-सामने देखने से ज़्यादा आनंद देता है। भगवान के ऐसे भक्त उन्हें हर पल आमने-सामने देखते हैं, जैसा कि ब्रह्म-संहिता (5.38) में पुष्टि की गई है:

प्रेमाण्जन-चंचुरित-भक्ति-विलोचनेन

सन्तः सदैव हृदयेषु विलोकयन्ति

यम् श्यामसुन्दरम् अचिन्त्य-गुण-स्वरूपम्

गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम अहं भजामि

"जो भगवान की परम पुरुषता, भगवान श्यामसुन्दर [कृष्ण] के साथ प्रेम के परमानंद में हैं, वे उन्हें हमेशा अपने दिलों में प्यार और भगवान के प्रति दी गई भक्ति सेवा के कारण देखते हैं।" विदुर और उद्धव दोनों ही ऐसे उन्नत भक्त थे, और इसलिए वे दोनों यमुना के तट पर आए और एक दूसरे से मिले।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)