प्रेमाण्जन-चंचुरित-भक्ति-विलोचनेन
सन्तः सदैव हृदयेषु विलोकयन्ति
यम् श्यामसुन्दरम् अचिन्त्य-गुण-स्वरूपम्
गोविन्दम् आदि-पुरुषं तम अहं भजामि
"जो भगवान की परम पुरुषता, भगवान श्यामसुन्दर [कृष्ण] के साथ प्रेम के परमानंद में हैं, वे उन्हें हमेशा अपने दिलों में प्यार और भगवान के प्रति दी गई भक्ति सेवा के कारण देखते हैं।" विदुर और उद्धव दोनों ही ऐसे उन्नत भक्त थे, और इसलिए वे दोनों यमुना के तट पर आए और एक दूसरे से मिले।
