प्रकृतेः क्रियमाणानि
गुणैः कर्माणि सर्वशः
अहंकार-विमूढात्मा
कर्ताहम् इति मन्यते
बाह्य ऊर्जा के विभिन्न प्रकारों के प्रभाव में एक बंधी हुई आत्मा भौतिक अस्तित्व में डूबी हुई होती है। अहंकार में डूबी हुई, वह सोचती है कि वह सब कुछ स्वयं ही कर रही है। भगवान की बाहरी ऊर्जा, भौतिक प्रकृति, सुप्रीम भगवान के पूर्ण नियंत्रण में है, और बंधी हुई आत्मा पूरी तरह से बाहरी ऊर्जा की मुट्ठी में है। इसलिए, बंधी हुई आत्मा पूरी तरह से भगवान के कानून के नियंत्रण में है। लेकिन सिर्फ भ्रम होने की वजह से, वह अपनी गतिविधियों में स्वयं को स्वतंत्र मानती है। दुर्योधन बाहरी प्रकृति के ऐसे ही प्रभाव में कार्य कर रहा था, जिसके कारण अंततः उसका नाश हो जाता है। वह विदुर की अच्छी सलाह को स्वीकार नहीं कर सका, बल्कि इसके विपरीत उन्होंने उस महान आत्मा का अपमान किया, जो उनके पूरे परिवार का शुभचिंतक था। विदुर यह समझ सकते थे क्योंकि वह भगवान के एक परम भक्त थे। दुर्योधन के शब्दों से बहुत अधिक अपमानित होने के बावजूद, विदुर देख सकते थे कि दुर्योधन, माया के प्रभाव में, बाहरी ऊर्जा, अपने स्वयं के विनाश की ओर बढ़ रहा था। इसलिए उन्होंने बाहरी ऊर्जा के कार्यों को सर्वोच्च माना, फिर भी उन्होंने यह भी देखा कि भगवान की आंतरिक ऊर्जा ने उस विशेष स्थिति में उनकी मदद कैसे की। एक भक्त हमेशा वैराग्य के स्वभाव में रहता है क्योंकि सांसारिक आकर्षण उसे कभी संतुष्ट नहीं कर सकते। विदुर अपने भाई के शाही महल से कभी आकर्षित नहीं हुए। वह उस स्थान को छोड़ने और अपने आप को पूरी तरह से भगवान की पारलौकिक प्रेममय सेवा में समर्पित करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। अब उन्हें दुर्योधन की कृपा से यह अवसर मिला, और अपमान के तीखे शब्दों पर दुखी होने के बजाय, उन्होंने दिल से उनका धन्यवाद किया क्योंकि इससे उन्हें एक पवित्र स्थान पर अकेले रहने और भगवान की भक्ति सेवा में पूरी तरह से संलग्न होने का मौका मिला। शब्द गत-व्यथाः (बिना दुःख के) यहाँ महत्वपूर्ण है क्योंकि विदुर उन कष्टों से मुक्त हो गया था जो भौतिक गतिविधियों में उलझने वाले प्रत्येक व्यक्ति को परेशान करते हैं। इसलिए उन्होंने सोचा कि अपने भाई का अपने धनुष से बचाव करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि उनके भाई को बर्बाद करने के लिए ही बनाया गया था। इसलिए वह दुर्योधन के कार्य करने से पहले ही महल छोड़ कर चले गए। माया, भगवान की सर्वोच्च ऊर्जा, ने यहाँ आंतरिक और बाहरी दोनों तरह से कार्य किया।
