स एष दोष: पुरुषद्विडास्ते
गृहान् प्रविष्टो यमपत्यमत्या ।
पुष्णासि कृष्णाद्विमुखो गतश्री-
स्त्यजाश्वशैवं कुलकौशलाय ॥ १३ ॥
अनुवाद
तुम साक्षात् अपराध रूपी दुर्योधन का पालन-पोषण अपने बुद्धिमान पुत्र के रूप में कर रहे हो, किंतु वह भगवान श्री कृष्ण से ईर्ष्या करता है। चूँकि तुम इस प्रकार कृष्ण के अभक्त का पालन-पोषण कर रहे हो, इसलिए तुम सभी शुभ गुणों से रहित हो। तुम यथाशीघ्र इस दुर्भाग्य से छुटकारा पाओ और पूरे परिवार का कल्याण करो।
You are rearing Duryodhana, who is a manifestation of crime, as your infallible son, but he is jealous of Lord Krishna. Because you are rearing a non-devotee of Krishna in this way, you are devoid of all auspicious qualities. Get rid of this misfortune as soon as possible and bring welfare to the entire family.
तात्पर्य
एक अच्छे पुत्र को अपत्य कहते हैं, जो अपने पिता को गिरने नहीं देता। पिता की मृत्यु के उपरांत पुत्र, सर्वोच्च देव विष्णु को प्रसन्न करने के लिए बलिदान देकर अपने पिता की आत्मा की रक्षा कर सकता है। यह प्रणाली अभी भी भारत में प्रचलित है। अपने पिता की मृत्यु के बाद, एक पुत्र गया में विष्णु के चरण कमलों में बलिदान करने जाता है और इस प्रकार पिता के पतन से उनकी आत्मा को मुक्त करता है। लेकिन अगर पुत्र पहले से ही विष्णु का शत्रु है, तो ऐसे शत्रुतापूर्ण मूड में वह भगवान विष्णु के चरण कमलों में बलिदान कैसे दे सकता है? भगवान कृष्ण सीधे तौर पर भगवान विष्णु के व्यक्तित्व हैं, और दुर्योधन उनका शत्रु था। इसलिए वह अपने पिता, धृतराष्ट्र, की मृत्यु के बाद उनकी रक्षा करने में असमर्थ होगा। विष्णु के प्रति अपनी विश्वासघातीता के कारण वह स्वयं गिरने वाला था। फिर वह अपने पिता की रक्षा कैसे कर सकता था? विदुर ने धृतराष्ट्र को सलाह दी कि यदि वह अपने परिवार की भलाई के लिए उत्सुक हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द दुर्योधन जैसे अयोग्य पुत्र से छुटकारा पाना चाहिए। चाणक्य पंडित के नैतिक निर्देशों के अनुसार, "ऐसे पुत्र का क्या उपयोग है जो न तो विद्वान है और न ही ईश्वर का भक्त है?" यदि कोई पुत्र सर्वोच्च भगवान का भक्त नहीं है, तो वह बंद आँखों की तरह है - परेशानी का एक स्रोत। एक चिकित्सक कभी-कभी ऐसी बेकार आँखों को उनकी सॉकेट से निकालने की सलाह दे सकता है ताकि व्यक्ति को लगातार परेशानी से राहत मिल सके। दुर्योधन बिल्कुल अंधी, परेशान करने वाली आंखों की तरह था; वह धृतराष्ट्र के परिवार के लिए बड़ी मुसीबत का सबब होगा, जैसा कि विदुर ने पहले ही बताया था। इसलिए विदुर ने अपने बड़े भाई को परेशानी के इस स्रोत से छुटकारा पाने की सही सलाह दी। धृतराष्ट्र ऐसे निजीकृत अपराध को इस गलत धारणा के तहत बनाए रख रहे थे कि दुर्योधन एक अच्छा पुत्र है, जो अपने पिता को मुक्त करने में सक्षम है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥