किसी को सही स्रोत से पारलौकिक ध्वनि प्राप्त करनी होती है, इसे एक वास्तविकता के रूप में स्वीकार करना होता है और बिना किसी हिचकिचाहट के निर्देशों का पालन करना होता है। सफलता का रहस्य एक वास्तविक आध्यात्मिक गुरु के सही स्रोत से ध्वनि प्राप्त करना है। सांसारिक रूप से निर्मित ध्वनि में कोई क्षमता नहीं होती है, और इस तरह, एक अनधिकृत व्यक्ति से प्राप्त होने वाली पारलौकिक ध्वनि में भी कोई क्षमता नहीं होती है। ऐसी पारलौकिक क्षमता को समझने के लिए किसी को पर्याप्त रूप से योग्य होना चाहिए, और या तो विवेक से या भाग्यशाली संयोग से यदि कोई वास्तविक आध्यात्मिक गुरु से पारलौकिक ध्वनि प्राप्त करने में सक्षम है, तो उसके मुक्ति के मार्ग की गारंटी है। हालाँकि, शिष्य को वास्तविक आध्यात्मिक गुरु के आदेशों का पालन करने के लिए तैयार रहना चाहिए जैसा कि भगवान ब्रह्मा ने अपने आध्यात्मिक गुरु, स्वयं भगवान के निर्देशों का पालन किया था। वास्तविक आध्यात्मिक गुरु के आदेश का पालन करना शिष्य का एकमात्र कर्तव्य है, और वास्तविक आध्यात्मिक गुरु के आदेश का यह पूरी तरह से विश्वासयोग्य निष्पादन ही सफलता का रहस्य है।
भगवान ब्रह्मा ने इंद्रिय बोध और इंद्रियों के माध्यम से अपनी दो प्रकार की इंद्रियों को नियंत्रित किया क्योंकि उन्हें भगवान के आदेश के निष्पादन में ऐसी इंद्रियों को संलग्न करना था। इसलिए इंद्रियों को नियंत्रित करने का मतलब है उन्हें भगवान की पारलौकिक सेवा में लगाना। प्रभु का आदेश वास्तविक आध्यात्मिक गुरु के माध्यम से शिष्य उत्तराधिकार में उतरता है, और इस प्रकार वास्तविक आध्यात्मिक गुरु के आदेश का निष्पादन इंद्रियों का वास्तविक नियंत्रण है। पूर्ण विश्वास और ईमानदारी से इस तरह की तपस्या करने से ब्रह्मा जी इतने शक्तिशाली बन गए कि वे ब्रह्मांड के निर्माता बन गए। और क्योंकि वह ऐसी शक्ति प्राप्त करने में सक्षम थे, इसलिए उन्हें सभी तपस्वियों में सर्वश्रेष्ठ कहा जाता है।
