तब पिता (ब्रह्मा) ने अपने पुत्र नारद को श्रीमद्भागवत नामक उपवेद पुराण सुनाया। श्रीमद्भागवत की कथा भगवान ने स्वयं ब्रह्मा को बतायी थी और यह दस विशेषताओं से युक्त है।
Then the father (Brahma) narrated to his son Narada the Upveda Purana called Shrimad Bhagwat which was narrated to him by Shri Bhagwan and which is endowed with ten characteristics.
तात्पर्य
यद्यपि श्रीमद्-भागवतम केवल चार श्लोकों में बोला गया, लेकिन इसमें दस विशेषताएँ थीं, जिनकी व्याख्या अगले अध्याय में की जाएगी। शुरूआती चार श्लोकों में यह कहा गया है कि भगवान सृष्टि से पहले भी मौजूद थे, इस तरह श्रीमद्-भागवतम की शुरुआत में वेदांत सूत्र जनमाद्यस्य का समावेश होता है। जनमाद्यस्य आरंभ है, फिर भी चार श्लोकों में यह कहा गया है कि भगवान हर चीज़ की जड़ हैं, सृष्टि से लेकर भगवान के परमधाम तक, ये श्लोक स्वाभाविक रूप से दस विशेषताओं का वर्णन करते हैं। हमें गलत व्याख्याओं के कारण गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि भगवान ने केवल चार श्लोक ही बोले थे और इसलिए शेष सभी 17,944 श्लोक बेकार हैं। जैसा कि अगले अध्याय में समझाया जाएगा, दस विशेषताओं के लिए कई श्लोकों की आवश्यकता होती है ताकि उन्हें ठीक से समझाया जा सके। ब्रह्माजी ने पहले ही नारद को उपदेश दिया था कि जो कुछ उन्होंने ब्रह्माजी से सुना है, उसे उन्हें विस्तार से बताना चाहिए। श्री चैतन्य महाप्रभु ने श्रीला रूप गोस्वामी को इसका सार बताया, लेकिन शिष्य रूप गोस्वामी ने इसे बहुत विस्तार से समझाया, और इसी विषय पर बाद में जीव गोस्वामी और फिर श्री विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने और भी विस्तार से समझाया। हम सभी इन अधिकारियों के कदमों पर चलने की कोशिश कर रहे हैं। तो श्रीमद्-भागवतम साधारण कथा या सांसारिक साहित्य की तरह नहीं है। इसकी शक्ति असीम है और कोई इसे अपनी क्षमता के अनुसार कितना भी विस्तार दे, फिर भी भागवत का विस्तार कभी खत्म नहीं हो सकता। श्रीमद्-भागवतम भगवान का ध्वनि रूप है, इसलिए इसकी एक ही बार में चार श्लोकों में और चार खरब श्लोकों में व्याख्या की जाती है, क्योंकि भगवान परमाणु से भी छोटे हैं और असीमित आकाश से भी बड़े हैं। श्रीमद्-भागवतम की शक्ति ऐसी ही है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥