मच्चिता मद्गत-प्राणा
बोधयंतः परस्परं
कथयंतश्च माँ नित्यं
तुष्यंति च रमंति च
सर्वोच्च प्रभु असीमित हैं, और उनकी ऊर्जाएँ भी असीमित हैं। उन्हें पूरी तरह से कोई नहीं जान सकता। ब्रह्माजी, इस ब्रह्मांड के भीतर की सबसे बड़ी जीवित इकाई होने के नाते और भगवान द्वारा सीधे निर्देशित होने के कारण, इस ब्रह्मांड के भीतर किसी से भी अधिक जानते होंगे, हालाँकि ऐसा ज्ञान पूर्ण नहीं हो सकता है। इस प्रकार ब्रह्मा की शिष्य परंपरा में अध्यात्मिक गुरु से असीमित भगवान के बारे में पूछना हर किसी का कर्तव्य है, जो नारद से व्यास तक, व्यास से शुकदेव तक और इसी तरह आगे बढ़ती है।
