कृपया मुझे बताएं ताकि मैं भगवान के व्यक्तित्व द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार इस विषय में शिक्षित हो सकूं और इस तरह बिना किसी शर्त के जीवों को उत्पन्न करने में यंत्रवत कार्य कर सकूं।
Kindly tell me so that I may, as you command, acquire knowledge of this subject, and thus continue the work of mechanically creating living entities without being bound to such activities.
तात्पर्य
हिंदी-टेक्स्ट: ब्रम्हाजी अपनी व्यक्तिगत जानकारी की शक्ति पर निर्भर रहने वाले किसी सट्टेबाज नहीं बनना चाहते थे और भौतिक बंधन से परिस्थित थे। सभी को स्पष्ट चेतना में समझना चाहिए कि एक सभी गतिविधियों के निष्पादन में एक साधन है। एक संकल्पित आत्मा बाहरी ऊर्जा, गुणमयी माया, या भगवान की भ्रामक ऊर्जा के हाथों में है और मुक्त अवस्था में जीवित इकाई बिना किसी सीधे भगवान के व्यक्तित्व की इच्छा के लिए है। प्रभु की प्रत्यक्ष इच्छा के लिए साधन होना जीवित इकाई की स्वाभाविक संवैधानिक स्थिति है, जबकि प्रभु की भ्रामक ऊर्जा के हाथों में एक साधन होना जीवित इकाई के लिए भौतिक बंधन समतुल्य है। उस संकल्पित अवस्था में, जीवित इकाई अपने विभिन्न गतिविधियों और परम सत्य पर अटकलें लगाता है। लेकिन बिना शर्त वाले चरण में जीवित इकाई सीधे भगवान से ज्ञान प्राप्त करती है, और ऐसी मुक्त आत्मा किसी भी सट्टा आदत के बिना flawlessly कार्य करती है। भगवद गीता (10.10-11) इस बात की पुष्टि करता है कि शुद्ध भक्त, जो लगातार प्रभु की प्रेममयी पारलौकिक सेवा में लगे हुए हैं, को सीधे भगवान द्वारा सलाह दी जाती है, इतना ही है कि भक्त बिना किसी हिचकिचाहट के घर के रास्ते पर, भगवान को वापस प्रगति कर लेता है। इसलिए प्रभु के शुद्ध भक्त अपनी निश्चित प्रगति पर गर्व नहीं करते हैं, जबकि गैर-भक्त सट्टेबाज भ्रमपूर्ण ऊर्जा के अंधेरे में हैं और किसी भी निश्चित मार्ग के बिना अटकलों के आधार पर अपने भ्रामक ज्ञान पर बहुत गर्व होता है। भगवान ब्रह्मा उस गौरव के जाल से बचाना चाहते थे, हालांकि उन्हें ब्रह्मांड के भीतर सबसे ऊंचे पद पर रखा गया था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥