ब्रह्मा न केवल जीवों को उत्पन्न करके, बल्कि पतित आत्माओं को वापस पाने के लिए अपने दल का प्रसार करके भी अपने कर्तव्य का पालन करते हैं। दल को ब्रह्म सम्प्रदाय कहा जाता है और आज तक इस दल का कोई भी सदस्य स्वाभाविक रूप से पतित आत्माओं को वापस परमात्मा की ओर, वापस घर ले जाने में लगा हुआ है। भागवद गीता में कहे गए अनुसार, अपने अंगों और अंशों को वापस पाने के लिए भगवान बहुत उत्सुक हैं। कोई भी उससे अधिक प्रिय नहीं है जो पतित आत्माओं को वापस परमात्मा की ओर ले जाने का कार्य करता है।
ब्रह्म सम्प्रदाय से कई धर्मत्यागी हैं जिनका एकमात्र व्यवसाय मनुष्यों को भगवान के प्रति और अधिक भुलक्कड़ बनाना है और इस प्रकार उन्हें भौतिक अस्तित्व में और अधिक उलझाना है। ऐसे व्यक्ति भगवान को कभी प्रिय नहीं होते हैं और भगवान उन्हें पदार्थ के सबसे अंधेरे क्षेत्र में गहराई से भेजते हैं ताकि ऐसे ईर्ष्यालु राक्षस सर्वोच्च भगवान को जान न सकें।
हालाँकि, ब्रह्म सम्प्रदाय की रेखा में भगवान के मिशन का प्रचार करने वाला कोई भी व्यक्ति भगवान को हमेशा प्रिय होता है, और भगवान, अधिकृत भक्ति पंथ के ऐसे प्रचारक से संतुष्ट होकर, बहुत संतुष्टि के साथ उससे हाथ मिलाते हैं।
