जीव, कठोर तपस्या और शारीरिक व्यायाम के प्रदर्शन द्वारा, अस्थायी रूप से कुछ अद्भुत शक्ति प्राप्त कर सकता है, लेकिन वह उसे परम प्रभु नहीं बनाता है। परम प्रभु, अपनी शक्ति से, किसी भी योगी से असीमित रूप से अधिक शक्तिशाली हैं, वह किसी भी ज्ञानी की तुलना में असीमित रूप से अधिक विद्वान हैं, वह किसी भी धनी व्यक्ति से असीमित रूप से अधिक धनी हैं, वह किसी भी सुंदर जीव की तुलना में असीमित रूप से अधिक सुंदर हैं, और वह किसी भी परोपकारी की तुलना में असीमित रूप से अधिक दानी हैं। वह सबसे ऊपर हैं; कोई भी उनके बराबर या उनसे बड़ा नहीं है। न ही कोई किसी भी तप या योगिक प्रदर्शनों द्वारा उपरोक्त शक्तियों में उनके पूर्णता के स्तर तक पहुँच सकता है। योगी उनकी दया पर निर्भर हैं। उनके अत्यधिक दयालु स्वभाव से वह योगियों को उनके बारे में तड़पने के कारण कुछ अस्थायी शक्तियाँ प्रदान कर सकते हैं, लेकिन अपने अविभाजित भक्तों के लिए, जो प्रभु से उनकी पारलौकिक सेवा को छोड़कर और कुछ भी नहीं चाहते हैं, प्रभु इतने प्रसन्न होते हैं कि वह अविभाजित सेवा के बदले में खुद को दे देते हैं।
