श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 9: श्रीभगवान् के वचन का उद्धरण देते हुए प्रश्नों के उत्तर  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.9.15 
ददर्श तत्राखिलसात्वतां पतिं
श्रिय: पतिं यज्ञपतिं जगत्पतिम् ।
सुनन्दनन्दप्रबलार्हणादिभि:
स्वपार्षदाग्रै: परिसेवितं विभुम् ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने वैकुण्ठधाम में भगवान विष्णु को देखा, जो सभी भक्तों के स्वामी, लक्ष्मीजी के पति, समस्त यज्ञों के स्वामी और पूरे ब्रह्माण्ड के स्वामी हैं। वे नंद, सुनंद, प्रबल और अर्हण जैसे अपने प्रमुख पार्षदों द्वारा सेवित होते हैं।
 
Brahmā saw the Lord in the Vaikuntha world, who is the master of all devotees, the husband of Lakṣmī, the master of all sacrifices and the Lord of the universe and who is served by His leading associates, namely, Nanda, Sunanda, Prabal and Arhan.
तात्पर्य
जब हम राजा की बात करते हैं तो यह स्वाभाविक रूप से समझ आ जाता है कि राजा के साथ उसके भरोसेमंद सहयोगी होते हैं, जैसे उसका सचिव, निजी सचिव, सहयोगी-डे-कैंप, मंत्री और सलाहकार। इसी तरह जब हम प्रभु को देखते हैं तो हम उन्हें उनकी विभिन्न शक्तियों, सहयोगियों, भरोसेमंद सेवकों आदि के साथ देखते हैं। इसलिए सर्वोच्च प्रभु, जो सभी जीवों के नेता हैं, सभी भक्त संप्रदायों के स्वामी हैं, सभी वैभवों के स्वामी हैं, सभी बलिदानों के स्वामी हैं और उनकी संपूर्ण सृष्टि में हर चीज का आनंद लेने वाले हैं, न केवल सर्वोच्च व्यक्ति हैं, बल्कि हमेशा अपने तात्कालिक सहयोगियों से घिरे रहते हैं, सभी उसके प्रति अपनी प्रेममय पारलौकिक सेवा में लगे रहते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)