श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 9: श्रीभगवान् के वचन का उद्धरण देते हुए प्रश्नों के उत्तर  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  2.9.13 
भ्राजिष्णुभिर्य: परितो विराजते
लसद्विमानावलिभिर्महात्मनाम् ।
विद्योतमान: प्रमदोत्तमाद्युभि:
सविद्युदभ्रावलिभिर्यथा नभ: ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
वैकुण्ठ लोक विभिन्न चमचमाते विमानों से घिरे हैं। ये विमान महात्माओं या भगवद्भक्तों के हैं। स्त्रियाँ अपने स्वर्गीय मुखमण्डल के कारण बिजली के समान सुंदर लगती हैं और ये सब मिलकर ऐसे प्रतीत होते हैं मानो बादलों तथा बिजली से आकाश सुशोभित हो।
 
The entire Vaikuntha planet is also surrounded by various glittering aircrafts. These aircrafts belong to the great souls or devotees of the Lord. The women look as beautiful as lightning due to their heavenly faces and all of them together appear as if the sky is decorated with clouds and lightning.
तात्पर्य
ऐसा प्रतीत होता है कि वैकुंठ ग्रहों पर भी तेज़ी से चमकते हुए विमान हैं और उन पर भगवान के महान भक्तों का निवास है जिसमें दिव्य सुंदरता वाली महिलाएँ हैं जो बिजली की तरह चमकीली हैं। जैसे कि विमान हैं, इसलिए हवाई जहाज की तरह विभिन्न प्रकार की गाड़ियाँ भी होंगी, लेकिन वे संचालित मशीनें नहीं हो सकती हैं, जैसा कि हमने इस दुनिया में अनुभव किया है। क्योंकि प्रत्येक वस्तु शाश्वतता, आनंद और ज्ञान की समान प्रकृति की है, इसलिए हवाई जहाज और गाड़ियाँ भी ब्रह्म के समान गुणवत्ता के हैं। यद्यपि ब्रह्म के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है, लेकिन किसी को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि केवल शून्य है और कोई विविधता नहीं है। इस तरह का सोचना ज्ञान की कमी के कारण है; अन्यथा किसी को भी ब्रह्म में शून्यता की ऐसी गलतफहमी नहीं होती। जैसा कि विमान, महिलाएं और पुरुष हैं, इसलिए शहर और घर और अन्य सब कुछ भी उस विशेष ग्रह के लिए उपयुक्त होना चाहिए। किसी को भी इस दुनिया की अपूर्णता के विचारों को दिव्य दुनिया में नहीं ले जाना चाहिए और वायुमंडल की प्रकृति को ध्यान में नहीं रखना चाहिए, जैसा कि पिछले भाग में वर्णित है, समय के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त आदि।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)