वैकुण्ठ लोक के निवासियों का वर्णन श्यामवर्ण का किया गया है जो आभामंडल से युक्त है। उनकी आँखें कमल-पुष्प के समान हैं, उनके वस्त्र पीले रंग के हैं और उनकी शारीरिक बनावट अत्यंत आकर्षक है। वे युवावस्था में हैं, उनके चार हाथ हैं और वे मोती के हार और अलंकृत पदकों से सुशोभित हैं। उनकी उपस्थिति बहुत ही तेजस्वी है।
The inhabitants of Vaikuntha Loka are described as having a radiant dark complexion. Their eyes are like lotus flowers, their clothes are yellowish in colour and their physique is very attractive. They are like emerging youths, all of them have four hands. They appear very radiant, well adorned with pearl necklaces and decorated medals.
तात्पर्य
वैकुण्ठलोक में रहने वाले सभी व्यक्ति आध्यात्मिक शारीरिक विशेषताओं वाले नर हैं जो भौतिक दुनिया में नहीं पाए जाते। हम श्रीमद् भागवतम् जैसे प्रकट शास्त्रों में वर्णन पा सकते हैं। शास्त्रों में अलौकिकता के अवैयक्तिक वर्णन बताते हैं कि वैकुण्ठलोक में शारीरिक विशेषताएँ ब्रह्मांड के किसी भी हिस्से में कभी नहीं देखी जानी चाहिए। जैसा कि किसी विशेष ग्रह के अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग शारीरिक विशेषताएं होती हैं, या जैसे अलग-अलग ग्रहों में शरीरों के बीच अलग-अलग शारीरिक विशेषताएं होती हैं, उसी तरह वैकुण्ठलोक में रहने वालों की शारीरिक विशेषताएं भौतिक ब्रह्मांड से बिल्कुल अलग होती हैं। उदाहरण के लिए, चार हाथ इस दुनिया के दो हाथों से अलग हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥