श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 9: श्रीभगवान् के वचन का उद्धरण देते हुए प्रश्नों के उत्तर  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.9.1 
श्रीशुक उवाच
आत्ममायामृते राजन् परस्यानुभवात्मन: ।
न घटेतार्थसम्बन्ध: स्वप्नद्रष्टुरिवाञ्जसा ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा- हे राजन, जब तक मनुष्य पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान की शक्ति से प्रभावित नहीं होता तब तक भौतिक शरीर के साथ शुद्ध चेतना में शुद्ध आत्मा के सम्बन्ध का कोई अर्थ नहीं है। यह सम्बन्ध स्वप्न देखने वाले द्वारा अपने ही शरीर को कार्य करते हुए देखने के समान है।
 
Sri Sukadeva Goswami said—O King, unless one is influenced by the energy of the Supreme Personality of Godhead, the association of the pure soul in pure consciousness with the physical body has no meaning. Such association is like a dreamer seeing his own body functioning.
तात्पर्य
महाराजा परीक्षित का यह प्रश्न कि कैसे एक जीवित इकाई ने अपना भौतिक जीवन शुरू किया, यद्यपि वह भौतिक शरीर और मन से अलग है, का उत्तर पूर्ण रूप से दिया गया है। आध्यात्मिक आत्मा अपने जीवन की भौतिक अवधारणा से भिन्न होती है, लेकिन वह इस तरह की भौतिक अवधारणा में इसलिए लीन हो जाता है क्योंकि वह भगवान की बाहरी ऊर्जा के प्रभाव में होता है जिसे आत्म-माया कहते हैं। इसे प्रथम कैंटो में पहले ही समझाया जा चुका है कि व्यासदेव सर्वोच्च भगवान और उनकी बाहरी ऊर्जा का एहसास कैसे करते हैं। बाहरी ऊर्जा भगवान द्वारा नियंत्रित होती है, और जीवित इकाइयाँ बाहरी ऊर्जा द्वारा - भगवान की इच्छा से नियंत्रित होती हैं। इसलिए, यद्यपि जीवित इकाई अपनी शुद्ध अवस्था में विशुद्ध रूप से चेतन है, वह भगवान की बाहरी ऊर्जा से प्रभावित होकर भगवान की इच्छा के अधीन है। भगवद-गीता (15.15) में भी यही बात पुष्टि की गई है: भगवान प्रत्येक जीवित इकाई के हृदय में उपस्थित हैं, और सभी जीवित इकाई की चेतना और विस्मृति भगवान द्वारा प्रभावित होती है।

अब अगला प्रश्न अपने आप बनेगा तो वह यह कि भगवान जीवित इकाई को इस तरह की चेतना और विस्मृति में क्यों प्रभावित करते हैं। उत्तर यह है कि भगवान स्पष्ट रूप से चाहते हैं कि प्रत्येक जीवित इकाई भगवान के एक अंग और पार्सल के रूप में अपनी शुद्ध चेतना में रहे और इस प्रकार भगवान की प्रेममयी सेवा में लगे रहे क्योंकि वह संविधान रूप से बने हैं; लेकिन क्योंकि जीवित इकाई भी आंशिक रूप से स्वतंत्र है, वह भगवान की सेवा करने के लिए तैयार नहीं हो सकता है, लेकिन वह भगवान की तरह स्वतंत्र बनने का प्रयास कर सकता है। सभी गैर-भक्त जीवित इकाइयाँ भगवान के समान ही शक्तिशाली बनने के इच्छुक हैं, यद्यपि वे ऐसा बनने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। जीवित इकाइयों को भगवान की इच्छा से मोह हो जाता है क्योंकि वे उनके जैसे बनना चाहते थे। उस व्यक्ति की तरह जो आवश्यक योग्यता के बिना राजा बनने के बारे में सोचता है, जब जीवित इकाई स्वयं भगवान बनने की इच्छा करता है, तो उसे यह सपना देखने की स्थिति में डाल दिया जाता है कि वह एक राजा है। इसलिए जीवित इकाई की पहली पापी इच्छा भगवान बनना है, और भगवान की परिणामी इच्छा यह है कि जीवित इकाई अपने वास्तविक जीवन को भूल जाए और इस तरह उस यूटोपिया की भूमि का सपना देखे जहाँ वह भगवान की तरह एक हो सकता है। बच्चा माँ से चाँद लेने के लिए रोता है, और माँ चाँद के प्रतिबिंब से रोते और परेशान बच्चे को संतुष्ट करने के लिए बच्चे को दर्पण देती है। इसी तरह, भगवान के रोते हुए बच्चे को प्रतिबिंब, भौतिक दुनिया को कर्मी के रूप में सौंप दिया जाता है और भगवान के साथ एक होकर निराशा में इसे छोड़ दिया जाता है। ये दोनों अवस्थाएँ केवल भ्रमपूर्ण सपने ही हैं। जीवित इकाई ने कब यह इच्छा की, इसके इतिहास का पता लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है। लेकिन तथ्य यह है कि जैसे ही उसने इसकी इच्छा की, उसे भगवान के निर्देशन से आत्म-माया के नियंत्रण में डाल दिया गया। इसलिए अपनी भौतिक स्थिति में जीवित इकाई झूठा सपना देख रहा है कि यह "मेरा" है और यह "मैं" हूँ। सपना यह है कि वातानुकूलित आत्मा अपने भौतिक शरीर को "मैं" के रूप में सोचती है या झूठे तौर पर सोचती है कि वह भगवान है और उस भौतिक शरीर के संबंध में सब कुछ "मेरा" है। इस प्रकार केवल सपने में ही "मैं" और "मेरा" की भ्रांति जीवन के बाद जीवन जारी रहती है। यह जीवन के बाद जीवन जारी रहता है, जब तक कि जीवित इकाई भगवान के अधीनस्थ भाग और पार्सल के रूप में अपनी पहचान के बारे में विशुद्ध रूप से सचेत नहीं है।

हालाँकि, उसकी शुद्ध चेतना में, ऐसा कोई गलत सपना नहीं है, और उस शुद्ध चेतन अवस्था में जीवित इकाई यह नहीं भूलता है कि वह स्वयं कभी भगवान नहीं है, लेकिन वह हमेशा के लिए परमात्मा प्रेम में भगवान का सेवक है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)