यहाँ दिया गया उदाहरण बहुत उपयुक्त है। एक यात्री दूर-दूर के स्थानों में, कभी जंगल में और कभी समुद्र पर और कभी पहाड़ियों पर धन की खोज के लिए घर छोड़ देता है। निश्चित रूप से ऐसे अज्ञात स्थानों में जाने पर यात्री को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। किन्तु उसकी पारिवारिक आत्मीयता की भावना याद आते ही ऐसी सभी परेशानियाँ तुरंत दूर हो जाती हैं, और जैसे ही वह घर लौटता है वह रास्ते में आने वाली ऐसी सभी परेशानियों को भूल जाता है।
प्रभु का शुद्ध भक्त प्रभु के साथ एक पारिवारिक बंधन में बंधा होता है, और इसलिए वह प्रभु के साथ एक पूर्ण स्नेहमय बंधन में अपने कर्तव्य का निर्वाह करने में अविचल रहता है।
