श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 7: विशिष्ट कार्यों के लिए निर्दिष्ट अवतार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.7.9 
यद्वेनमुत्पथगतं द्विजवाक्यवज्र-
निष्प्लुष्टपौरुषभगं निरये पतन्तम् ।
त्रात्वार्थितो जगति पुत्रपदं च लेभे
दुग्धा वसूनि वसुधा सकलानि येन ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
महाराजा वेन ने पापमय मार्ग अपना लिया, जिसके कारण ब्राह्मणों ने वज्रशाप देकर उन्हें दंडित किया। इस शाप से राजा वेन के पुण्य कर्म और ऐश्वर्य जल गए और वे नरक की ओर जाने लगे। लेकिन भगवान ने अपनी असीम कृपा से उनके पुत्र पृथु के रूप में जन्म लेकर शापित राजा वेन को नरक से मुक्ति दिलाई और धरती से अनेक प्रकार की फसलें प्राप्त कीं।
 
महाराजा वेन ने पापमय मार्ग अपना लिया, जिसके कारण ब्राह्मणों ने वज्रशाप देकर उन्हें दंडित किया। इस शाप से राजा वेन के पुण्य कर्म और ऐश्वर्य जल गए और वे नरक की ओर जाने लगे। लेकिन भगवान ने अपनी असीम कृपा से उनके पुत्र पृथु के रूप में जन्म लेकर शापित राजा वेन को नरक से मुक्ति दिलाई और धरती से अनेक प्रकार की फसलें प्राप्त कीं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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