श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 7: विशिष्ट कार्यों के लिए निर्दिष्ट अवतार  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.7.50 
सोऽयं तेऽभिहितस्तात भगवान् विश्वभावन: ।
समासेन हरेर्नान्यदन्यस्मात् सदसच्च यत् ॥ ५० ॥
 
 
अनुवाद
हे पुत्र, मैंने तुम्हें प्रकट संसारों के सृष्टिकर्ता परम दिव्य पुरुष, भगवान् के विषय में संक्षेप में समझाया है। उनके (भगवान् हरि) के अलावा दृश्य और अदृश्य अस्तित्वों का कोई अन्य कारण नहीं है।
 
हे पुत्र, मैंने तुम्हें प्रकट संसारों के सृष्टिकर्ता परम दिव्य पुरुष, भगवान् के विषय में संक्षेप में समझाया है। उनके (भगवान् हरि) के अलावा दृश्य और अदृश्य अस्तित्वों का कोई अन्य कारण नहीं है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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