येषां स एष भगवान् दययेदनन्त:
सर्वात्मनाश्रितपदो यदि निर्व्यलीकम् ।
ते दुस्तरामतितरन्ति च देवमायां
नैषां ममाहमिति धी: श्वशृगालभक्ष्ये ॥ ४२ ॥
अनुवाद
लेकिन जो कोई परमेश्वर की सेवा करने के लिए निस्वार्थ रूप से आत्मसमर्पण करता है, उसे परमेश्वर का विशेष आशीर्वाद मिलता है और वह माया के गहन सागर को पार करके भगवान को समझ सकता है। लेकिन जो लोग इस शरीर से जुड़े हुए हैं, जो अंत में कुत्तों और गीदड़ों का भोजन बन जाएगा, वे ऐसा नहीं कर सकते।
But if by selfless surrender to the service of the Lord one is blessed with the special grace of the Supreme Lord, he can cross the impassable ocean of Maya and know the Lord. But those who are attached to this body, which is ultimately destined to be food for dogs and jackals, cannot do so.
तात्पर्य
भगवान के अद्वितीय भक्त भगवान की महिमा को इस अर्थ में जानते हैं कि वे समझ सकते हैं कि भगवान कितने महान हैं और विविध ऊर्जा का उनका विस्तार कितना महान है। जो लोग नाशवान शरीर से जुड़े होते हैं वे शायद ही कभी ईश्वर के विज्ञान के क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं। संपूर्ण भौतिकवादी दुनिया, भौतिक शरीर को आत्म के रूप में अवधारणा पर आधारित है, ईश्वर के विज्ञान के बारे में अनभिज्ञ है। भौतिकवादी हमेशा भौतिक शरीर के कल्याण के लिए काम करने में व्यस्त रहता है, न केवल अपने लिए बल्कि अपने बच्चों, परिजनों, समुदाय के लोगों, देशवासियों आदि के लिए भी। भौतिकवादियों के पास राजनीतिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दृष्टि से परोपकारी और परोपकारी गतिविधियों की कई शाखाएँ हैं, लेकिन कोई भी क्षेत्र कार्य भौतिक शरीर को आत्मा आत्मा के साथ पहचानने की गलत अवधारणा के अधिकार क्षेत्र से परे नहीं जा सकता। इसलिए, जब तक कोई शरीर और आत्मा की गलत अवधारणा से नहीं बचा जाता है, तब तक ईश्वर का कोई ज्ञान नहीं होता है, और जब तक ईश्वर का ज्ञान नहीं होता है, भौतिक सभ्यता की सभी उन्नति, हालांकि चकाचौंध हो, उसे विफलता माना जाना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥