श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 7: विशिष्ट कार्यों के लिए निर्दिष्ट अवतार  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.7.39 
सर्गे तपोऽहमृषयो नव ये प्रजेशा:
स्थानेऽथ धर्ममखमन्वमरावनीशा: ।
अन्ते त्वधर्महरमन्युवशासुराद्या
मायाविभूतय इमा: पुरुशक्तिभाज: ॥ ३९ ॥
 
 
अनुवाद
सृष्टि की शुरूआत में तपस्या, मैं (ब्रह्मा) और संतान उत्पन्न करने वाले महर्षि प्रजापति रहते हैं; फिर सृष्टि के संचालन में भगवान विष्णु, नियंत्रक देवता और विभिन्न लोकों के राजा रहते हैं। लेकिन अंत समय में अधर्म ही शेष रह जाता है और तब भगवान शिव और क्रोधी नास्तिक आदि होते हैं। ये सब परम शक्ति रूप भगवान की शक्ति के विभिन्न प्रतिनिधि रूप में रहते हैं।
 
सृष्टि की शुरूआत में तपस्या, मैं (ब्रह्मा) और संतान उत्पन्न करने वाले महर्षि प्रजापति रहते हैं; फिर सृष्टि के संचालन में भगवान विष्णु, नियंत्रक देवता और विभिन्न लोकों के राजा रहते हैं। लेकिन अंत समय में अधर्म ही शेष रह जाता है और तब भगवान शिव और क्रोधी नास्तिक आदि होते हैं। ये सब परम शक्ति रूप भगवान की शक्ति के विभिन्न प्रतिनिधि रूप में रहते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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