श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 7: विशिष्ट कार्यों के लिए निर्दिष्ट अवतार  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.7.37 
देवद्विषां निगमवर्त्मनि निष्ठितानां
पूर्भिर्मयेन विहिताभिरद‍ृश्यतूर्भि: ।
लोकान् घ्नतां मतिविमोहमतिप्रलोभं
वेषं विधाय बहु भाष्यत औपधर्म्यम् ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
जब नास्तिक वैदिक विज्ञान में महारत हासिल कर लेंगे और महान वैज्ञानिक मय द्वारा निर्मित उत्तम रॉकेटों में चढ़कर, आकाश में अदृश्य होकर अलग-अलग ग्रहों के निवासियों का संहार करेंगे, तब भगवान बुद्ध के रूप में बेहद आकर्षक वेश धारण कर उनके दिमाग को मोह लेंगे और उन्हें उपधर्मों का उपदेश देंगे।
 
जब नास्तिक वैदिक विज्ञान में महारत हासिल कर लेंगे और महान वैज्ञानिक मय द्वारा निर्मित उत्तम रॉकेटों में चढ़कर, आकाश में अदृश्य होकर अलग-अलग ग्रहों के निवासियों का संहार करेंगे, तब भगवान बुद्ध के रूप में बेहद आकर्षक वेश धारण कर उनके दिमाग को मोह लेंगे और उन्हें उपधर्मों का उपदेश देंगे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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