श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 7: विशिष्ट कार्यों के लिए निर्दिष्ट अवतार  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.7.31 
नन्दं च मोक्ष्यति भयाद् वरुणस्य पाशाद्
गोपान् बिलेषु पिहितान् मयसूनुना च ।
अह्न्यापृतं निशि शयानमतिश्रमेण
लोकं विकुण्ठमुपनेष्यति गोकुलं स्म ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री कृष्ण ने अपने पालक पिता नंद महाराज को वरुण देवता के भय से बचाया और ग्वाल-बालों को पहाड़ की कंदरा से मुक्त किया, जहाँ मयासुर ने उन्हें कैद कर रखा था। इतना ही नहीं, भगवान श्री कृष्ण ने वृंदावन के सभी निवासियों को, जो दिन भर काम में व्यस्त रहकर रात में थक कर चैन की नींद सोते थे, परलोक में सर्वोच्च लोक का भागीदार बना दिया। ये सभी कार्य दिव्य हैं और उनके ईश्वरत्व को प्रमाणित करते हैं ।
 
भगवान श्री कृष्ण ने अपने पालक पिता नंद महाराज को वरुण देवता के भय से बचाया और ग्वाल-बालों को पहाड़ की कंदरा से मुक्त किया, जहाँ मयासुर ने उन्हें कैद कर रखा था। इतना ही नहीं, भगवान श्री कृष्ण ने वृंदावन के सभी निवासियों को, जो दिन भर काम में व्यस्त रहकर रात में थक कर चैन की नींद सोते थे, परलोक में सर्वोच्च लोक का भागीदार बना दिया। ये सभी कार्य दिव्य हैं और उनके ईश्वरत्व को प्रमाणित करते हैं ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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