मां च योऽव्यभिचारेण
भक्ति-योगेन सेवते
स गुणान् समतीत्यैतान
ब्रह्म-भूयाय कल्पते
गैरमुक्त अवस्था में भी जीवात्मा परमेश्वर कृष्ण या उनके पूर्ण विस्तार जैसे राम तथा नरसिंह की पारलौकिक प्रेममयी सेवा में सीधे तौर पर संलग्न हो सकता है। इस प्रकार ऐसी पारलौकिक भक्तिमयी सेवा के समानुपातिक सुधार के साथ भक्त निश्चित रूप से ब्रह्म-गति या आत्म-गति की ओर बढ़ता है और अंततः कपाल की गत्य प्राप्त कर लेता है या बिना किसी कठिनाई के प्रभु के निवास स्थान को प्राप्त करता है। प्रभु की भक्तिमयी सेवा की रोगाणुरोधी शक्ति इतनी महान है कि भक्त के वर्तमान जीवन में भी यह भौतिक संक्रमण को समाप्त कर सकती है। भक्त को पूर्ण मुक्ति के लिए अपने अगले जन्म की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है।
