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श्लोक 2.7.28  |
यद् वै व्रजे व्रजपशून् विषतोयपीतान्
पालांस्त्वजीवयदनुग्रहदृष्टिवृष्टया ।
तच्छुद्धयेऽतिविषवीर्यविलोलजिह्व-
मुच्चाटयिष्यदुरगं विहरन् ह्रदिन्याम् ॥ २८ ॥ |
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| अनुवाद |
| और तब जब ग्वालों और उनके जानवरों ने यमुना नदी के विषैले जल को पिया और भगवान ने उन सबको अपने बचपन में ही अपनी कृपादृष्टि से जीवित कर दिया। उसके बाद, यमुना नदी के जल को शुद्ध करने के लिए ही वे खेल-खेल में उस नदी में कूद पड़े। उन्होंने उस विषैले कालिय नाग को दंडित किया जो अपनी जलती हुई जीभ से विष की लहरें निकाल रहा था। परमेश्वर के अलावा भला ऐसा महान कार्य करने में और कौन समर्थ हो सकता है? |
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| और तब जब ग्वालों और उनके जानवरों ने यमुना नदी के विषैले जल को पिया और भगवान ने उन सबको अपने बचपन में ही अपनी कृपादृष्टि से जीवित कर दिया। उसके बाद, यमुना नदी के जल को शुद्ध करने के लिए ही वे खेल-खेल में उस नदी में कूद पड़े। उन्होंने उस विषैले कालिय नाग को दंडित किया जो अपनी जलती हुई जीभ से विष की लहरें निकाल रहा था। परमेश्वर के अलावा भला ऐसा महान कार्य करने में और कौन समर्थ हो सकता है? |
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